Diwali puja muhurat 2019


दिवाली के दिन सूर्यदेव का दिन, चित्रा नक्षत्र और अमावस्या का लगभग 37 साल बाद बना महासंयोग महालक्ष्मीजी की कृपा बरसाएगा। साथ ही मां काली की आराधना भी फलेगी।  कार्तिक मास की चतुर्दशी 27 नवंबर को दिवाली धूमधाम से मनाई जाएगी।
Diwali puja muhurat 2019
Happy Diwali 2019

कोई इस दिन लक्ष्मी पूजा करता है तो कोई काली पूजा। मगर, इस दिन देवी के किसी न किसी स्वरूप की पूजा जरूर होती है साथ लोग अपने-अपने घरों दियों से सजाते हैं। मगर, दिवाली के दिन यदि सही मुहूर्त और सही विधि से देवी की पूजा की जाए तो यह फलदायक साबित हो सकती हैं।

Diwali puja muhurat 2019
Diwali puja muhurat 2019

Diwali puja muhurat 2019

दिवाली लक्ष्मी गणेश पूजा 
दिन-रविवार
अक्टूबर 27, 2019 पर
पूजा मुहूर्त – शाम 06:43 से शाम 08:15 तक
अवधि – 01 घण्टा 32 मिनट्स
प्रदोष काल – 
शाम 05:41से  शाम 08:15 तक
वृषभ काल – शाम 06:43  से शाम 08:39 तक
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 27, 2019 को  दोपहर 12:23  बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त – अक्टूबर 28, 2019 को सुबह 09:08  बजे तक


दीपावली पर देवी लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है।
 इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए, क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाए तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है।



Pradosh kal | प्रदोष काल



27 अक्टूबर 2019, रविवार के दिन दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में 17:40 से 20:16 तक प्रदोष काल रहेगा. इसे प्रदोष काल का समय कहा जाता है. प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है. इस दिन 18:42 से 20:37 के दौरान वृष लग्न रहेगा. प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों रहने से मुहुर्त शुभ रहेगा.

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि(pujan ki vidhi)-

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। साथ ही घर के द्वार पर रंगोली और दीयों की एक शृंखला बनाएं।पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें।माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें।महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए।महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें।पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार ज़रुरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा दें।

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