here are 10 short stories for the kids with moral in hindi


    दो बकरियों की कहानी 10 best hindi short stories for kids with moral



    एक बार एक घना जंगल था। उस जंगल में ढेरों जानवर रहते थे। उस जंगल में एक नदी हुआ करती थी, जिसे पार करने के लिए उसके ऊपर से एक पुल बना हुआ था। वह पुल कम चौड़ा था, जिससे कि उस पुल को एक बार में केवल एक ही जानवर पार कर सकता था।

    एक दिन एक बकरी उस पुल को पार कर रही थी, तभी अचानक दूसरी तरफ से भी एक बकरी सामने आकर खड़ी हो गयी। दोनों बकरियां पुल के बीच आमने-सामने खड़ी हो गयी। अब दोनों बकरियां आपस में लड़ाई करने लगी कि पहले मै पुल पार करूंगी। पहली बकरी बोली कि तू पीछे हो जा, तो मै पुल पार कर लुंगी। लेकिन दूसरी बकरी भी उसकी बात नही मानी और वो भी पहली बकरी को कहने लगी कि तू पीछे हट जा।
    उन दोनों बकरियों में से किसी ने भी बात नही मानी और पुल के ऊपर खड़ी होकर झगड़ती रही। थोड़ी देर झगड़ने के बाद पुल की रस्सी टूट गयी। दोनों बकरियां नदी में जा गिरी और मर गयी।
    शिक्षा:- मुर्ख व्यक्ति अपनी ज़िद्द की वजह से खुद को ही नुकसान पहुंचाते है।

    नन्हीं चिड़िया ~ 10 best hindi short stories for kids with moral


    बहुत समय पुरानी बात है। एक बहुत घना जंगल था। एक दिन उस जंगल मे किसी कारण से आग लग गयी। सभी जानवर इतनी बड़ी आग को देखकर डरने लगे कि अब क्या होगा? थोड़ी ही देर के बाद जानवरों मे भगदड़ सी मच गयी। सभी जानवर इधर-उधर भाग रहे थे। सभी जंगल अपनी जान बचाने मे लगे हुए थे। उस जंगल मे एक छोटी चिड़िया रहती थी। जब उसने देखा कि जंगल मे आग लगी हुई है तो उसने जानवरो की मदत करने की सोची।
    ये सब सोचने के बाद वह छोटी चिड़िया जल्दी से नदी मे गयी और चोंच मे पानी भरकर लायी और आग मे डालने लगी। वह बार-बार नदी मे जाती और पानी लाकर आग मे डालती। पास से ही एक उल्लू गुजर रहा था। उसने उस चिड़िया को देखा और बोला कि यह चिड़िया कितनी पागल है जो इतनी भीषण आग को बुझाने मे लगी हुई है। यही सोचने के बाद उल्लू उस चिड़िया के पास गया और बोला कि तुम पागल हो इस तरह से आग नहीं बुझाई जा सकती है।
    चिड़िया ने बहुत ही प्यारा सा जवाब दिया “मुझे पता है कि मेरे इस प्रयास से कुछ नही होगा, लेकिन मुझे अपनी तरफ से मेरा पूरा योगदान देना है। आग कितनी भी भयंकर हो मै मेरा प्रयास नही छोडूंगी।” उल्लू यह सुनकर बहुत ही प्रभावित हुआ।

    बंदर और मगरमच्छ ~ 10 best hindi short stories for kids with moral



    एक जंगल मे नदी के किनारे जामुन के पेड़ पर एक बंदर रहता था। उस पेड़ पर बहुत मीठे-मीठे जामुन लगते थे और बंदर बहुत मज़े से जामुन खाता था। तभी एक दिन नदी मे से एक मगरमच्छ भोजन की तलाश मे जामुन के पेड़ के निचे आया। बंदर ने उससे वहां आने का कारण पूछा तो मगरमच्छ ने सारी बात बताई।

    उसके बाद बंदर ने कहा कि इस पेड़ पर बहुत ही मीठे जामुन लगते है। बंदर ने मगरमच्छ को जामुन दिए। बंदर और मगरमच्छ मे दोस्ती हो गयी। मगरमच्छ अब रोज जामुन खाने के लिए नदी किनारे जामुन के पेड़ के नीचे आता था।
    एक दिन मगरमच्छ थोड़े जामुन अपनी पत्नी के लिए लेकर गया। उसकी पत्नी को वो जामुन बहुत स्वादिष्ट लगे। उसकी पत्नी ने उससे पूछा कि ये जामुन तुम कहा से लाते हो, तो मगरमच्छ ने कहा कि नदी किनारे जामुन के पेड़ पर मेरा बंदर दोस्त रहता है, वही जामुन देता है मुझे। ये सुनकर उसकी पत्नी के मन मे लालच आया और वो मगरमच्छ से बोली कि मै उस बंदर का जिगर खाना चाहती हूँ, तुम मेरे लिए उस बंदर को यहां ले आओ। पहले तो मगरमच्छ ने मना कर दिया लेकिन उसकी पत्नी ज़िद करने लगी। मगरमच्छ बहुत ही परेशान हुआ और चुपचाप बंदर को लेने के लिए नदी किनारे जामुन के पेड़ के नीचे गया।
    वहां पहुचकर मगरमच्छ ने एक चाल चली और बंदर को बुलाया। बंदर जल्दी से आ गया। मगरमच्छ ने बंदर से कहा कि आज मेरी पत्नी ने तुमको दावत पर बुलाया है। बंदर तो जल्दी से तैयार हो गया। मगरमच्छ ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाया और पानी मे चलने लगा। जब मगरमच्छ पानी के बीच मे पहुँचा तो उसने सोचा कि अब बंदर को सच्चाई बताने मे कोई हानि नही है। उसने बंदर से सब सच बता दिया कि मेरी पत्नी तुम्हारा दिल खाना चाहती है। मगरमच्छ की ये बात सुनते ही बंदर का दिल टूट गया। उसको बहुत दुःख हुआ, परन्तु बंदर ने हार नही मानी। बंदर ने जल्दी से बचने की तरकीब सोची। बंदर जल्दी से बोला- “अरे मेरे मित्र तुमने पहले क्यों नही बताई ये बात, मै मेरा दिल तो जामुन के पेड़ पर ही भूल गया हूँ। अब मुझे जल्दी से जामुन के पेड़ के पास ले चलो।”
    मुर्ख मगरमच्छ जामुन के पेड़ की तरफ चलने लगा। जैसे ही वो जामुन के पेड़ के करीब पहुच तो बंदर तेजी से कूदा और जामुन के पेड़ पर चढ़ गया और गुस्से मे बोला- “मुर्ख कोई दिल के बिना ज़िन्दा भी रह सकता है, तूने मुझे धोखा दिया है, जा तेरी मेरी दोस्ती खत्म।”
    शिक्षा:- मुसीबत के क्षणों में धैर्य नहीं खोना चाहिए और अनजान से दोस्ती सोच समझकर करनी चाहिए और मित्रता का सदैव सम्मान करें।

    सोने का अंडा ~ 10 best hindi short stories for kids with moral



    एक बार एक किसान था। वह बहुत गरीब था। एक दिन अचानक उसे एक मुर्गी मिली जो रोज एक सोने का अंडा देती थी। किसान बहुत खुश हुआ। वह मुर्गी रोज एक सोने का अंडा देती थी, जिससे वह किसान धीरे-धीरे अमीर होता जा रहा था। अब वह बहुत खुश था। उसके परिवार का खर्चा बहुत अच्छी तरह से चल रहा था। देखते ही देखते वह किसान उसके गाँव का सबसे अमीर आदमी बन गया। उसकी जिंदगी बहुत ही मज़े मे कट रही थी। अब उसके पास बहुत सारा धन था। उसने उस धन से एक बड़ा घर, घोड़े और खेती के लिए एक बहुत बड़ी ज़मीन खरीद ली थी।
    एक दिन किसान ने सोचा कि ये मुर्गी रोज एक ही अंडा देती है। उसने सोचा कि इसके अंदर बहुत सारे अंडे होंगे। एक दिन उसने सोचा कि क्यों ना मै सारे अंडे आज ही निकाल लेता हूँ और रातों-रात बहुत धनवान हो जाऊंगा। किसान जल्दी से गया और उस सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को पकड़ लाया और उसको मार दिया। अब उसने देखा कि उसे कुछ नही मिला। वह बहुत ही परेशान हुआ।
    शिक्षा:- लालच बुरी बला है।

    बिल्ली और बन्दर ~ 10 best hindi short stories for kids with moral

    एक जंगल में दो बिल्लियां रहती थी। उन दोनों मे बहुत ही गहरी दोस्ती थी। उन दोनों को कुछ भी खाने के लिए मिलता था तो बहुत ही प्यार से मिल बांट कर खाती थी। एक दिन वो दोनों जंगल के पास एक गाँव मे घूमने के लिए गयी। वहाँ उनको चलते-चलते एक रोटी का टुकड़ा मिला। उन दोनों ने एक साथ ही रोटी को पकड़ा जिससे कि रोटी के दो टुकड़े हो गए। जैसे ही दोनों बिल्लियां रोटी खाने चली तो उनमे से एक बिल्ली बोली- “तुम्हारा टुकड़ा बड़ा है।” तभी दूसरी बिल्ली बोली- “नही मेरा टुकड़ा बड़ा नही है।” उन दोनों मे बहुत देर तक इसी बात को लेकर झगड़ा चलता रहा।
    तभी वहां से एक बंदर गुज़र रहा था। बिल्लियों ने बंदर को बुलाया और बोली- “क्या तुम हमारा रोटी के टुकड़े को बराबर कर सकते हो।” तभी बंदर ने कहा- “क्यों नही, जरूर कर देंगे।” बंदर जल्दी से गया और एक तराजू उठाकर ले आया। बंदर ने दोनों बिल्लियों से रोटी के टुकड़े तराजू पर रखने के लिए बोला। बिल्लियों ने टुकड़े तराजू पर रख दिए। अब बंदर ने जैसे ही तराजू को उठाया तो एक रोटी के टुकड़े मे ज्यादा वजन था।
    बंदर बहुत चालाक था। उसने उस भारी टुकड़े मे से थोडा सा टुकड़ा खा लिया। उसके बाद उसने फिर से तराजू को उठाया। इस बार दूसरे टुकड़े का वजन ज्यादा हो गया। बंदर ने फिर से उस बड़े टुकड़े मे से थोडा सा हिस्सा खा लिया। बंदर ऐसा तब तक करता रहा जब तक रोटी का टुकड़ा खत्म नही हुआ। उसके बाद बंदर वहां से भाग गया और दोनों बिल्लियां खड़ी होकर देखती रही।
    शिक्षा:- हमें कभी आपस में नही लड़ना चाहिए, नही तो कोई दूसरा आकर फायदा उठा लेगा।

    लालची कुत्ता ~ 10 best hindi short stories for kids with moral


    एक बार एक कुत्ता था। वह बहूत ही भूखा था, क्योंकि उसे कई दिनों से कुछ खाने को नही मिला। वो भोजन की तलाश मे इधर-उधर घूमता रहा। तभी उसे एक दिन रोटी का बड़ा टुकड़ा मिला और उसने उस रोटी के टुकड़े को अपने मुँह मे पकड़ा और किसी महफूज जगह पर जाने लगा। तभी वह एक नदी के पुल के ऊपर से गुज़र रहा था।
    उसने पुल के ऊपर से नदी मे देखा तो उसे नदी मे उसकी परछाई दिखी और उसने सोचा कि यह कोई दूसरा कुत्ता है। उसके मन मे लालच आ गयी थी। उसने सोचा कि उस दूसरे कुत्ते की भी रोटी छीन लू। जैसे ही उसने भोंकने के लिए अपना मुँह खोला तो उसकी रोटी नदी मे गिर गयी। वह बहुत उदास हो गया।
    शिक्षा:- लालच बुरी बला है।

    कछुआ और ख़रगोश ~ 10 best hindi short stories for kids with moral


    एक बार एक जंगल में तालाब के किनारे एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों मे गहरी मित्रता थी। कछुआ अपनी धीमी चाल और खरगोश अपनी तेज चाल के लिए मशहूर था। एक दिन उन दोनों के बीच मे अपनी अपनों चाल को लेकर बहस हो गयी। खरगोश कछुऐ की धीमी चाल का उपहास उड़ाने लगा।
    उसकी बात सुनकर कछुआ चिढ़कर बोला- “मैं धीमी गति से चलता हूँ तो क्या हुआ, यदि हमारी आपसी दौड़ हो जाए तो मैं तुम्हें पक्का हरा दूँगा।”
    यह सुनकर खरगोश आश्चर्य से बोला- “क्यों मजाक करते हो कछुए भाई। तुम मुझे दौड़ में क्या हराओगे, पहले अपनी चाल तो देख लो।”
    कछुआ बोला- “मैं मजाक नही कर रहा खरगोश भाई। मैं यकीन के साथ कह रहा हूँ कि मैं दौड़ में तुम्हें हरा दूँगा।”
    खरगोश हँसते हुए बोला- “तो ठीक है, अगर तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो दौड़ हो जाए।”
    कछुआ खरगोश की बात से सहमत हो गया। अगले ही दिन उन्होने तालाब के किनारे के एक मैदान को दौड़ के लिए चुना। वहाँ से एक मील दूर स्थित बरगद के पेड़ को वह स्थान माना जहाँ पर दौड़ खत्म होनी थी।
    अगले दिन दौड़ शुरू हो गई। खरगोश तो पलक झपकते ही दौड़ा और बहुत दूर निकल गया। लेकिन कछुआ धीमी गति से चलता रहा।
    लगभग आधा मील पहुँचकर खरगोश रुका और पीछे मुड़कर देखा कि आखिर कछुआ गया कहाँ? जब उसे कछुआ दूर तक कही नजर नही आया तो उसने सोंचा कि कुछ देर आराम क्यों न कर लूँ। जब कछुआ दिखाई देगा तो उठकर तेजी से दौड़ लूँगा। यह सोचकर वह वही एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा और कुछ ही देर में उसे गहरी नींद आ गई।
    उधर कछुआ धीमी गति से निरंतर अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहा। खरगोश बहुत देर तक सोता रहा। जब वह जागा तो उसे कछुआ कहीं नजर नही आया। वह फुर्ती से उठा और तेजी से बरगद के पेड़ की ओर दौड़ने लगा। लेकिन पेड़ के निकट पहुँचते ही मानो उसके पैरो नीचे से धरती ही खिसक गई हो। वह यह देखकर चकित रह गया कि कछुआ तो वहां पहले से ही मौजूद था। वह हार गया था। उसने आगे बढ़कर कछुए को बधाई दी। उस दिन से उसने कछुए की धीमी चाल का मजाक उड़ाना बंद कर दिया।
    शिक्षा:- लगातार परिश्रम करने से ही सफलता मिलती है।

    शेर और चूहा ~ 10 best hindi short stories for kids with moral


    एक बार एक शेर था। वह एक घने जंगल मे रहता था। वह अपनी गुफ़ा मे सो रहा था। तभी शेर की गुफ़ा मे कही से एक शरारती चूहा आ पहुँचा और सोते हुए शेर के ऊपर कूदने लगा। तभी शेर की नींद खुल गयी और शेर ने उसे अपने पंजो मे दबोच लिया।
    शेर उस चूहे को खाने की सोच रहा था, लेकिन तभी चूहा डरता हुआ बोला, “हे जंगल के राजा, मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी। कृपया करके मुझे माफ़ कर दीजिये, मै आपका एहसान कभी नही भूलूंगा और मै भी कभी मुसीबत मे आपकी मदत करूँगा।” ये सुनकर शेर को चूहे पर हंसी आई कि ये छोटा सा है, मेरी क्या मदत करेगा। और फिर उसने चूहे को छोड़ दिया।
    फिर एक दिन शेर जंगल मे अपने शिकार के लिए निकला, परन्तु शेर किसी शिकारी के जाल मे फंस गया। वह उस जाल से निकल नही पा रहा था। वह मदत के लिए जोर-जोर स दहाड़ रहा था। तभी उसकी दहाड़ने की आवाज़ चूहे ने सुनी और जल्दी से शेर की मदत करने के लिए आ पहुँचा।
    चूहे ने शेर से कहा कि महाराज आप चिंता ना करे, मै आपको अभी निकाल देता हूँ इस जाल से। तभी चूहे ने अपने नुकीले दांतो से उस जाल को काट दिया और शेर को आजाद कर दिया। तभी शेर ने उस चूहे को धन्यवाद किया। उसके बाद वो दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए और ख़ुशी ख़ुशी जंगल मे रहने लगे।


























    शिक्षा:- हमे कभी भी किसी के शरीर को देखकर उसका मजाक नही बनाना चाहिए।

    गधा और धोबी ~ 10 best hindi short stories for kids with moral


    एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी कमजोर था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पिने को मिल पाता था।

    एक दिन धोबी को एक मरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, "मै गधे के ऊपर इस बाघ की खाल डाल दूँगा और उसे पड़ोसियों के खेतों मे चरने के लिए छोड़ दिया करूँगा। किसान समझेंगें कि वह सचमुच का बाघ है और उससे डरकर दूर रहेंगे और गधा आराम से चर लिया करेगा।"


    धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गयी।

    एक रात, गधा खेत मे चर रहा था कि उसे किसी गधी की रेंकने की आवाज़ सुनाई दी। उस आवाज़ को सुनकर वह इतने जोश मे आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा।

    गधे की आवाज़ सुनकर किसानों को उसकी असलियत का पता लग गया और उन्होंने गधे की खूब पिटाई की।

    शिक्षा:- इसलिए कहा गया है कि अपनी सच्चाई नही छिपानी चाहिए

    दो मुंह वाली चिड़िया ~ 10 best hindi short stories for kids with moral



    नंदन वन में एक नन्हीं चिड़िया रहती थी, जिसके दो मुँह थे। दो मुँह होने के कारण वह चिड़िया दूसरे पंछियों से बिल्कुल विचित्र दिखती थी। वह चिड़िया एक बरगद के पेड़ पर घौंसला बना कर रहती थी।
    एक दिन वह चिड़िया जंगल में भोजन की तलाश में इधर उधर उड़ रही थी। अचानक चिड़िया के दायें वाले मुँह की नजर एक लाल फल पर पड़ी। देखते ही उसके मुँह में पानी आ गया और वह तेजी से वो लाल फल खाने को आगे बढ़ी।

    अब चिड़िया का दायाँ मुँह बड़े स्वाद से वो फल खा रहा था। बायाँ मुँह बेचारा बार बार दाएं मुंह की तरफ देख रहा था कि ये मुझे भी खाने को दे, लेकिन दायाँ वाला चुपचाप मस्ती से फल खाये जा रहा था।
    अब बाएँ मुँह ने दाएँ वाले से प्रार्थना की, कि थोड़ा सा फल खाने को मुझे भी दे दो तो इसपर दाएं मुंह ने गुस्सा दिखाते हुए कहा – कि हम दोनों का पेट एक ही है। अगर मैं खाऊँगा तो वो हमारे पेट में ही जायेगा। लेकिन उसने बाएं वाले को कुछ खाने को नहीं दिया।
    अगले दिन चिड़िया फिर से जंगल में खाने की तलाश में उड़ रही थी। तभी बाएं मुँह की नजर एक अदभुत फल पर पड़ी जो बहुत चमकीला था। वह तेजी से उस फल की तरफ लपका। अब जैसे ही वो फल खाने को हुआ तुरंत पास बैठे एक कौए ने चेतावनी दी कि इस फल को मत खाओ ये बहुत जहरीला है।
    ये सुनकर दायाँ मुंह भी चौंका और बाएं से प्रार्थना की कि इस फल को मत खाओ ये हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित होगा, लेकिन बाएं मुंह को तो दाएं से बदला लेना था।
    उसने एक ना सुनी और चुपचाप वह फल खाने लगा। कुछ ही देर में चिड़िया का शरीर मृत होकर जमीन पर गिर पड़ा।

    दोस्तों कहानी सुनने में तो आनंद आया होगा, लेकिन जब मैं आपको इसकी शिक्षा बताऊंगा तो आपकी आँखे फटी रह जाएँगी। आजकल के माहौल में देखा जाता है कि एक ही परिवार के लोग एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं, एक दूसरे से दुश्मनी रखते हैं। लेकिन जब भी वह एक दूसरे को नुकसान पहुँचाने का सोचते हैं या एक दूसरे से बदला लेने का सोचते हैं तो नुकसान पूरे परिवार का ही होता है। इसलिए एक दूसरे से मिल जुल कर रहें क्योंकि अगर परिवार का एक भी सदस्य गलत काम करे तो नुकसान पूरे परिवार का होता है। यही इस कहानी की शिक्षा है।


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