Cinderella ki kahani



एक बार की बात है, एक नगर में एक बहूत अमीर आदमी रहता था। उसकी एक पत्नी ओर प्यारी सी बेटी भी थी। जिसका नाम सिंडरेला था।
इनका छोटा सा परिवार बड़ी हँसी खुशी के साथ रहता था। पर ये खुशियाँ इस परिवार में ज्यादा दिन टिक नही पाई। हुआ ये की सिंडरेला की माँ बीमार पड़ गयी।

जब सिंड्रेला की माँ को अपनी मौत दिखाई दी। तो उसने अपनी बेटी सिंड्रेला को अपने पास बुलाया। ओर कहा, मेरी प्यारी बेटी में अब तेरे साथ नही रह सकू गी। तुम्हे अब अकेले ही रहना होगा।
सिंडरेला बहूत छोटी थी, जो उसकी माँ कह रही थी। उसे ये समझ में नही आ रहा था की वो ऐसी बात क्यो कर रही है।
जब सिंडरेला अपनी माँ के पास बैठी तो उसकी माँ ने कहा की बेटी में जाने से पहले तुम्हे कुछ बातें बताना चाहती हूँ। जो तुम्हारी जिंदगी में तुम्हारे हमेशा काम आएं गी।
उसने कहा की मेरी प्यारी बच्ची, हमेशा अपने बड़ो की बात मानना ओर उनकी इज़्ज़त करना ओर अपना हर काम दिल लगा कर करना चाहे वो कैसा भी काम क्यो न हो। मैं तुम्हारे पास न होते हुये भी हमेशा तुम्हारे साथ रहूं गी।
ये बातें कहने के कुछ टाइम बाद सिंडरेला की माँ गुज़र गयी। माँ के जाने के बाद सिंडरेला की जिंदगी में मानों दुखों का पहाड़ सा टूट गया। सिंडरेला हमेशा अपनी माँ को याद करके रोती रहती थी।



कुछ टाइम बीत जाने के बाद सिंडरेला ने अपने आप को संभाला ओर वह फिर अपनी जिंदगी में लोट आई। सिंडरेला के पिता सिंडरेला से बहूत प्यार करते थे। वो कभी उसे उसकी माँ की याद नही आने देते थे। हमेशा उसे खुश रखते। ऐसे ही समय बीतता गया।



कुछ समय बाद सिंडरेला के पिता ने दूसरी शादी कर ली। सिंडरेला भी अपने पिता के इस फैसले से बहूत खुश थी। क्योकि उसे एक नयी माँ मिल गयी थी ओर 2 प्यारी बहने।

सिंडरेला के पिता ने जिस औरत से शादी की उसकी 2 बेटियाँ भी थी। सिंडरेला अपनी माँ ओर बहनों से बहूत प्यार करती थी। लेकिन उसकी नई माँ ओर उसकी दोनो बेटियां उसे जरा भी पसंद नही करती थी। लेकिन वो सिंडरेला के पिता के डर से उसके साथ प्यार जताने का दिखावा करती थी।



एक बार की बात है जब उसके पिता किसी काम के लिए बाहार गए हुए थे। उस दिन के बाद वो कभी वापिस नही लोटे। पिता के जाने के बाद सिंडरेला बहूत अकेली पड़ गयी। उसकी शोतेली माँ ओर बहनों ने उसके साथ बुरा व्यहवार करना शुरू कर दिया।



उसके सभी अच्छे कपड़े जूते ओर सारी ज्वेलरी छीन ली। ओर इसके बदले में सिंडरेला को फट्टे कपड़े ओर लड़की के जूते दे दिए गए। ओर रहने ओर सोने के लिए एक गंदा कमरा दे दिए।
जब सिंडरेला खाना खाने लगी। तो उसके दोनो शोतेली बहने उस को चिल्लाते हुए बोली अब तुम्हे ऐसे ही फ्री खाना नही मिले गा।


इसे तुम्हे कमाना पड़े गा। जाओ ओर नोकरानी के साथ उसके काम में हाथ बटाऔ। इसी प्रकार सिंडरेला हर रोज घर का सारा काम खुद ही करने लगी। उसकी बहने जान भुज कर उसे जिड़ाती रहती। उसे तंग करने के लिए उसका बना बनाया काम खराब कर देती। जैसे सब्जियों को फर्श पर बिखेर देती ओवन की राख को कहीं कहीं बिखेर देती। ताकि उसे वह काम फिर दुबारा से करना पड़े।


ऐसे ही काम करते करते वह थक हार कर कहीं भी सो जाती।


जिस कमरे में सिंडरेला रहती थी। उस कमरे में बड़े-बड़े चूहे रहते थे। शुरू में तो सिंडरेला को उन से बहूत डर लगा पर धीरे धीरे वे भी उसके दोस्त बन गए।


एक दिन राज्य में एक घोषणा हुई। जिसमे नगर के राजा ने अपनी शादी के लिए नगर की सभी लड़कियों को आमंत्रित किया।


ओर कहा जो भी लड़की नगर के राजा को पसंद आये गी। राजा उसके साथ ही विवाह करे गए। ये घोषणा सुनकर नगर की सभी लड़कियां राजकुमार के सपने देखने लगी। ओर अपने आपको सजने सवारने में लग गयी। सिंडरेला की बहन भी राजकुमार के स्वयंवर में जाने के लिए तैयारियों में लग गयी।





उन्होंने सिंडरेला को अपने पास बुलाया ओर कहा की जल्दी से हमारे ड्रेस तैयार करो, हमारे बालों को सवारों हमारे जूतों को ब्रश करो। हमें राजा के स्वयंवर में जाना है। ओर देखना राजकुमार हमीं दोनों में से किसी एक को पसंद करे गे।
सिंडरेला ने उनकी आज्ञा का पालन किया। ओर उनकी तैयार होने में मदद की। जब सिंड्रेला ने अपनी बहनों को सजते संवरते देखा तो उसका भी मन किया की वह भी राजकुमार से मिलने जाए। ओर अपनी यही इच्छा अपनी शोतेली माँ के सामने जाहिर की


सिंडरेला की माँ ने हस्ते हुए कहा की तुम सिंडरेला, तुम कैसे जाओ गई तुम कितनी गंदी दिखाई दे रही हो। कपड़ों पर तुम्हारे धूल मिट्टी लगी हुई है। ना ही तुम्हारे पास पहनने के लिए कोई अच्छी पोशाक। तुम वहाँ क्या करो गी। यह सुनकर सिंडरेला रोने लगी। ये देखकर माँ ने कहा अगर तुम्हे भी जाना है तो 2 घंटे के अंदर घर की साफ सफाई बाकी घर के सारे काम पूरे कर दो। फिर हम तुमको वहाँ साथ ले जा सकते है।

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जैसे तैसे सिंडरेला ने जल्दी जल्दी अपना काम किया ओर अपनी शोतेली माँ के पास जा कर बोली। की मैने सब काम कर दिया है। अब तो आप मुझे अपने साथ ले जा सकती है। यह सुनकर शोतेली माँ बोली नही सिंडरेला वो तो मैन यु ही तुम्हे खुश करने के लिए बोल दिया था। ताकि तुम घर का सारा काम पूरा कर लो। हम तुम्हे वह नही ले जा सकते। क्योंकि तुम बहूत गंदी दिखाई दे रही हो। न ही तुम्हारे पास पहनने के लिए कोई ढंग के कपड़े ओर न ही तुम्हे तुम्हारी बहनों की तरह अच्छा डांस करना आता। ये कह कर वो सभी राजकुमार के स्वयंवर में चले गए।


सिंडरेला यह सुन कर जोर जोर से रोने लगी। ओर अपने कमरे में जा बैठी। सिंडरेला रोते रोते अपनी माँ को याद कर रही थी। ओर बोल रही थी की आप मुझे छोड़ कर क्यों चले गए। इतने में ही कुछ सिंडरेला को अपने कमरे में प्रकाश से दिखाई दिया। ओर उसमे से एक सुंदर परी निकली। ओर उसने सिंडरेला से पूछा की आप क्यों रो रहे हो। जब सिंडरेला अपनी सारी कहानी परी को बताई।


परी ने मुस्कुराते हुए सिंडरेला को कहा क्या तुम्हारा सच में राजकुमार के यहाँ जाने का मन है। यह सुनकर कर सिंड्रेला ने झट से हामी भरी।


परी ने अपनी जादुई छड़ी से तुरंत सिंडरेला के लिए एक सुंदर पोशाक तैयार कर दी। जिसे पहनकर सिंडरेला बहूत सुंदर दिखाई दे रही थी।


जब सिंडरेला राजकुमार के स्वयंवर में जाने लगी तो परी ने कहा की तुम्हे जाने से पहले एक बात ध्यान में रखनी है। ये मेरा जादू कुछ देर के लिए ही होगा तुम्हारे पास इसके बाद वापिस तुम अपनी उन्हीं कपड़ों में आ जाओ गी। इसलिए तुम्हे टाइम रहते हुए 12 बजे से पहले ही यहाँ आना होगा। सिंडरेला ने परी की बात सुनकर राजकुमार के महल की तरफ बढ़ने लगी।



सिंड्रेला राजकुमार के महल में प्रवेश हुई। जो सभी लोगों की नज़र सिंडरेला पर टिक गयी। सभी लोग सिंडरेला की खूबसूरती की तारीफ करने लगे। सिंडरेला की दोनो बहने ओर शोतेली माँ भी वही थी। पर वो सिंडरेला को पहचान नही पाई। ओर ये सोच कर टाल दिया। की ये कोई राजकुमारी होगी।





जब राजकुमार ने महल में प्रवेश किया तो उनकी सीधी नज़र सिंडरेला पर गयी। ओर वो उनकी खूबसूरती देख कर मोहित हो गये। ओर सिंडरेला के पास जा कर उन्होंने सिंडरेला के साथ डांस करने की इच्छा जताई





सिंडरेला राजकुमार को देख कर बहूत खुश हुई। ओर राजकुमार के साथ डांस करने लगी। ओर दोनो डांस करते करते इतने मग्न हो गए। की माने वो आस पास के सभी लोगों को भूल गए हो।





जब सिंडरेला ने घड़ी की तरफ नज़र दौडाई तो देखा की 12 बजने में कुछ ही मिंट बची हुई हैं। तो सिंडरेला ने राजकुमार से दुरी बनाते हुये बीच पार्टी से ही चली गयी।

जब राजकुमार ने सिंडरेला का पीछा किया तो वो कहीं नही मिली। लेकिन सीढ़ियों पर सिंडरेला एक जूता मिला जो सिंडरेला जल्दी जल्दी में सिंडरेला के पैर से निकल गया था।





राजकुमार सिंडरेला के साथ बिताये वो पल भूल न सके ओर सिंडरेला को ढूंढने की कोशिश करने लगे। पर सिंडरेला उन्हें कहीं नही मिली। सिंडरेला को ढूढ़ने के लिए राजकुमार ने एक घोषणा करवाई ओर कहा की जिस किसी के भी पेर में ये जूता अच्छी तरह फिट होगा। राजकुमार उसी लड़की के साथ शादी करे गे।



तो ऐसे में राजकुमार के सभी सेवक घर घर जा कर जूता हर किसी लड़की को पहनाने लगे। पर किसी के पैर में जूता अच्छी तरह फिट नही हो रहा था। जब सेवक सिंडरेला के घर पहुंचे तो उन्हें सिंडरेला की बहनों कोभी जूता पहनाया। पर उन्हें भी फिट नही आया।


तो सेवकों ने सिंडरेला को जूता पहनाने के लिए उसे बुलाने को कहा। सिंडरेला की शोतेली माँ ने कहा की उसको जूता पहनाकर क्या करो गए। वो तो पार्टी में गयी ही नही। पर सेवकों ने राजकुमार के आदेश का हवाला देते हुए। सिंडरेला को बुलाने को कहा जब सिंडरेला को वहाँ बुलाया गया। तो सिंडरेला को वो जूता अच्छी तरह फिट हो गया।



यह देखकर उसकी माँ ओर बहनें अचंभित रह गयी। उन्हें यह देखकर यकीन ही नहीं हुआ। की वो इतनी सुंदर लड़की सिंडरेला ही थी।



जब सिंडरेला को सेवक राजमहल ले जाने लगे। तो शोतेली माँ ओर उसकी बहने जोर जोर से सिंडरेला के आगे रोने लगी। ओर माफी मांगने लगी। की हमें माफ कर दो सिंडरेला हमने तुम्हारे साथ बहूत बुरा किया। हमसे गलती हो गयी। सिंडरेला ने मुस्कुराते हुए अपनी माँ ओर बहनों को गले लगाया। ओर कहा आपने मुझे कभी अपना नही समझा पर मैंने आपको कभी प्राया नहीं समझा। जाइये मैंने आपको माफ किया। यह कहकर सिंडरेला अपने उसी गंदे कपड़ों के साथ राजकुमार की बग्गी में बैठकर राजमहल के लिए चल पड़ी।




जब राजा को सिंडरेला मिलने का पता चला तो वो ख़ुशी से तिलमिला उठे। ओर राजमहल के द्वार पर खड़े हो कर सिंडरेला का इंतज़ार करने लगे। जब सिंडरेला राजमहल पहुंची तो उन्होंने सिंडरेला को गंदे कपड़ों में देखा। ओर कुछ असमंजस में पड़ गए। लेकिन राजा ने सिंडरेला को उसकी चमकती खूबसूरत आंखों से पहचान लिया।





ओर इसी प्रकार सिंडरेला राजकुमार की महारानी बन गयी।
ओर खुशी खुशी राजमहल में रहने लगी।



 दोस्तों यह थी सिंड्रेला की कहानी ।इस कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है और वह यह है कि जिंदगी में चाहे हमें कितनी भी परेशानी क्यों ना हो एक ना एक दिन ऐसा अवश्य आता है जिस दिन हमें इन सब परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है

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