zindagi ek kiraye ka ghar hai lyrics in hindi

'जिंदगी एक किराए का घर है' (zindagi ek kiraye ka ghar hai) एक इस्लामिक कव्वाली है। इसे 'अपने मां बाप का दिल न दुखा" एल्बम में 'रईस अनवर साबरी' के द्वारा गाया गया है। इस कव्वाली को 'कैसर समस्तीपुर' ने लिखा है।

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा॥

मौत जब तुझको आवाज देगी ॥

घर से बाहर निकलना पड़ेगा,



रूठ जाएँगी जब तुझसे खुशियाँ,

गम के साँचे मे ढलना पड़ेगा,

वक्त ऐसा भी आएगा नादान ॥

तुझको काँटोंं पर चलना पड़ेगा,



कितना माशूर हो जाएगा तू,

इतना मजबूर हो जाएगा तू,

ये जो मखमल का चोला है तेरा ॥

ये कफन मेंं बदलना पड़ेगा,



कर ले इमान से दिल की सफाई,

छोड़ दे छोड़ दे तू बुराई,

वक्त बाकी है अब भी संभल जा ॥

वरना दो ज़क मेंं जलना पड़ेगा,



ऐसी हो जाएगी तेरी हालत,

काम आएगी दौलत न ताकत,

छोड़कर अपनी ऊँची हवेली॥

तुझको बाहर निकलना पड़ेगा,



जलवा है हुस्न भी है और खतरा भी है ज्यादा,

जिंदगानी के ये रास्ता है हर कदम पर सम्भलना पड़ेगा,



बाप बेटे ये भाई भतीजे तेरे साथी है जीते जी के,

अपने आँगन से उठना पड़ेगा,

अपनी चौखट से टलना पड़ेगा,



जिंदगी एक किराये का घर है,

एक न एक दिन बदलना पड़ेगा......


zindagi ek kiraye ka ghar hai lyrics youtube video

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