अहोई अष्टमी Ahoi Ashtami

Ahoi ashtami vrat katha

अहोई अष्टमी को अहोई आठे भी कहते हैं अहोई का अर्थ होता है अनहोनी अहोई का व्रत महिलाएं अपने संतान के कल्याण के लिए रखती हैं इसे रखने से मां अपने बच्चों की अहोई माता से कल्याण की कामना करती हैं इस दिन महिलाएं करवाचौथ की तरह ही कठिन निर्जल व्रत रखती हैं शाम के समय तारों को देख कर अर्घ्य दिया जाता है हालांकि  कुछ महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं परंतु चंद्रमा इस दिन बहुत लेट से निकलता है अतः तारों को देख कर ही अर्घ्य दे दिया जाता है।
इस व्रत को महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी रखती हैं संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है अष्टमी का व्रत रखने से बच्चों की उन्नति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है
अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान करने का एक अलग ही महत्व है मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है

Ahoi Ashtami 2020 Date | Ahoi Ashtami kab hai

अहोई अष्टमी दीपावली से 8 दिन पहले तथा करवा चौथ के 4 दिन बाद आता है। 
2020 में अहोई अष्टमी 8 नवंबर को मनाई जाएगी

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 05:42 PM से 06:58 PM

तारों को देखने के लिए सांझ का समय - 06:05PM

अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय समय 12:10 AM, नवंबर 9
अष्टमी तिथि प्रारंभ - नवंबर 08, 2020 को 07:29 AM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - नवंबर 09, 2020 को 06:50 AM बजे

अहोई अष्टमी पूजा विधि (Ahoi Ashtami Puja Vidhi)


  • अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठे और घर की साफ सफाई करें
  • घर की साफ सफाई के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लें
  • अहोई अष्टमी का व्रत बिना पानी पिए किया जाता है अतः सुबह उठकर महिलाएं स्नान आदि से निवृत्त होकर मन में माता अहोई का ध्यान करके व्रत की शुरुआत करें।
  • शाम के समय दीवार पर माता अहोई का चित्र लगाएं इस चित्र में माता हुई के साथ उसके साथ पुत्र अवश्य होनी चाहिए
  • इसके बाद पानी से भरा हुआ करवा सिंघाड़े और मूली ले अगर करवा करवा चौथ का हो तो बहुत अच्छी बात है
  • इसके बाद माता हुई या अहोई अष्टमी की कथा सुने कहानी सोते समय हाथ में चावल लेकर इन चावलों को पल्लू से बांध
  • इसके बाद अहोई माता को 8 पुए और 14 पूरी का भोग लगाएं
  • कथा सुनने के बाद तारों की छांव में चावलों के साथ अर्घ्य दें
  • कथा सुनने के समय जो भोजन माता को अर्पित किया था वह भोजन किसी गाय को खिला दें
  • अगर इस दिन किसी ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है तो वह बहुत कल्याणकारी माना जाता है।
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Ahoi Ashtami vrat katha अहोई अष्टमी व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है एक बार एक साहूकार था तथा उसके सात बेटे और सात बहू थे। और साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली के समय ससुराल से अपने मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपना था इसलिए सातों बहुएं और ननद मिट्टी लाने के लिए जंगल में जाती हैं। साहूकार की बेटी जहां से मिट्टी ले रही थी वहां पर स्याहू अपने सात बेटों के साथ रहती थी । मिट्टी काटते समय गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी स्याहू को लग जाती है और खुरपी की चोट से स्याहू का एक बच्चा मर जाता है। इस बात पर स्याहू बहुत क्रोधित होता है और क्रोध में वह बोला कि मैं तुम्हारी कोख बांधुंगा।
 स्याहू की बात से साहूकार की बेटी डर जाती है और वह अपनी सात भाभियों से उसके बदले अपनी कोख बँधवाने के लिए विनती करती है। उसकी विनती को सुनकर उसकी छोटी भाभी अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है।
इस घटना के बाद जब भी उसकी छोटी भाभी के कोई संतान होती थी तो वह सात दिन बाद मर जाती थी।
इसके बाद साहूकार पंडित को बुलाकर इसका कारण पूछता है तब पंडित उसे सुरही गाय की सेवा करने की सलाह देता है।

सेवा से प्रसन्न सुरही उसे स्याहु के पास ले जाती है। इस बीच थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहुकार की छोटी बहू देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। वहां स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है।

अहोई माता की आरती Ahoi mata ki aarti | Ahoi Ashtami Aarti

जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता॥
जय अहोई माता॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता॥
जय अहोई माता॥

माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता॥
जय अहोई माता॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता॥
जय अहोई माता॥

जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता॥
जय अहोई माता॥

तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता॥
जय अहोई माता॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता॥
जय अहोई माता॥

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता॥
जय अहोई माता॥

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