गंगा सप्तमी 2020

Ganga jayanti, गंगा जयंती

गंगा मैया का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। सभी लोग प्यार से गंगा को गंगा मैया कह कर बुलाते हैं। गंगा सभी प्राणियों के पापों को नष्ट करती है और मोक्ष प्रदान करती है। हर वर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। प्राचीन काल में गंगा स्वर्ग में निवास करती थी। बैसाख शुक्ल सप्तमी तिथि को ये स्वर्ग से निकल कर भगवान शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थी। तभी से गंगा सप्तमी मनाई जाती है।
गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्वर्ग से भगवान शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थी। गंगा सप्तमी को गंगा जयंती भी कहते हैं। गंगा दशहरा के दिन गंगा, भगवान शिव शंकर की जटाओं से निकलकर धरती पर अवतरित हुई थी। गंगा दशहरा जेष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
इस वर्ष अर्थात 2020 में 30 अप्रैल को गंगा जयंती या गंगा सप्तमी मनाई जाएगी। आइए जानते हैं गंगा सप्तमी या गंगा जयंती का महत्व

गंगा सप्तमी ( गंगा जयंती) का महत्व

भगवान राम के पूर्वज राजा भगीरथ के अथक प्रयासों के फलस्वरूप माता गंगा भगवान शिव शंकर की जटाओं से निकलकर धरती पर अवतरित हुई थी। राजा भगीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तथा धरती पर लोगों के कल्याण की भावना से गंगा को पृथ्वी पर लेकर आए थे।
गंगा जयंती के दिन लोग गंगा में स्नान करके अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। माता गंगा मोक्ष दायिनी हैं। इसी भावना को ध्यान में रखकर लोग गंगा के पवित्र और पुण्य जल में स्नान करते हैं। तथा गंगा मैया का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस दिन माता गंगा के मंदिरों तथा गंगा घाट पर विशेष पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि गंगा के जल में स्नान करके 10 पापों से मुक्ति मिलती है तथा अंत में मोक्ष प्राप्त होता है। गंगा जयंती के दिन दान पुण्य करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


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