हीर रांझा की प्रेम कथा | Heer Ranjha ka kissa

Heer ranjha ka kissa

यह उस समय की बात है जब भारत और पाकिस्तान अलग अलग ना होकर एक ही थे। उसी समय पंजाब में चिनाब नदी के किनारे एक जगह है- तख्त हजारा। यह नदी अपने किनारे की खूबसूरती और वहां स्थित बगीचों की सुंदरता के लिए काफी प्रसिद्ध है। जिस कारण से उस स्थान को पूरब का स्वर्ग कहा जाता है। यही वह धरती है जहां पर रांझा लोग बड़े शान से घूमा करते थे। इनकी खास पहचान थी कि ये लोग कानों में बालियां पहनते थे तथा कंधे पर शॉल डाल कर रखते थे। ये लोग बड़े ही मस्त और बेपरवाह किस्म के होते थे।

यहीं पर एक बस्ती का मुखिया था मौजू चौधरी। उसके आठ बेटे तथा 2 बेटियां थीं। मौजू चौधरी की उस कुनबे में बहुत इज्जत थी। सभी लोग उन्हें मान सम्मान प्रदान करते थे। मौजू चौधरी अपने आठ बेटों में से अपने छोटे बेटे रांझा को सबसे ज्यादा प्यार करता था। जिसके कारण रांझा के बड़े भाई उससे जलते थे। रांझा मस्त होकर गांव में बांसुरी बजाता फिरता था तथा उसके बड़े भाई खेतों में मेहनत मजदूरी करते थे।

Story of heer ranjha...

जब रांझा के पिता का स्वर्गवास हो गया तब बड़े भाइयों ने सारी अच्छी जमीनें अपने पास रख ली। तथा रांझा को बंजर जमीन दे दीं। रांझा की भाभियाँ भी उसे बहुत परेशान करती थी। वह उसे कभी भी सम्मान पूर्वक खाना नहीं देती थी। और हर समय गृह क्लेश करती रहती थी। उसे हमेशा ताने सहन करने पड़ते थे। जिसके कारण रांझा ने अपना गांव छोड़ दिया।

रांझा घर से भागकर भटकते भटकते हीर के गांव झंग अब पाकिस्तान में है) पहुंचा। जब रांझा ने हीर को पहली बार देखा तो वह उसे देखता ही रह गया। और पहली नजर में ही रांझा को हीर से प्यार हो गया।

हीर सियाल जनजाति में पैदा हुई थी। और उसके पिता एक अमीर परिवार से थे। जब हीर ने भी रांझा को पहली बार देखा तो उसे पहली नजर में ही अपना दिल दे बैठी। अब हीर और रांझा एक दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करने लगे थे। और वह एक दूसरे से जुदा नहीं होना चाहते थे। इसलिए हीर ने अपने पिता से कहकर रांझा को गाय और भैंस चराने का काम दिलवा दिया, जिससे के रांझा हमेशा उसके पास रहे।

Heer ranjha ki katha...

रांझा गायों और भैंसों को चराने के लिए जंगल में ले जाता तथा हीर भी चुपके से उसके पास पहुंच जाती। और दोनों एक दूसरे के प्रेम में डूब जाते। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। लेकिन किस्मत को और कुछ ही मंजूर था।

कहते हैं इश्क छुपता नहीं छुपाने से। अतः एक रोज जब रांझा जंगल में पशुओं को चरा रहा था। तभी हीर के चाचा ने हीर और रांझा को एक साथ देख लिया। हीर और रांझा एक दूसरे से प्रेम पूर्वक लिपटे हुए थे। वे एक दूसरे से इस तरह प्यार कर रहे थे कि उन्हें अपने आसपास जो भी हो रहा था उसका पता नहीं लगा। वह तो सिर्फ एक दूसरे की आंखों में खोए हुए थे। और अपने प्रेम की चरम सीमा को प्राप्त करना चाहते थे।

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यह सारी बातें हीर के चाचा ने उसके पिता से कह दी। उसके पिता ने हीर की शादी सेदाखेड़ा नामक युवक से कर दी। यह शादी हीर की मर्जी के खिलाफ हुई थी अतः हीर ने इस शादी को कभी स्वीकार नहीं किया।

दूसरी तरफ जब रांझा ने हीर की शादी होते हुए देखी तो उसने बाबा गोरखनाथ से टीला जोगिया नामक जगह पर गुरु दक्षिणा ले ली और फकीर बन गए। अब रांझा गांव-गांव, गली-गली में गीत गाते हुए फिरता रहता था। और एक फकीर की जिंदगी जीता था। लेकिन वह मन से कभी हीर को भुला नहीं पाया।

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एक दिन जब वह ऐसे ही किसी एक गांव से गुजर रहा था, तभी उसने एक घर में हीर को देखा। वह पहली नजर में ही हीर को पहचान गया। अब रांझा रोज फकीर के भेष में हीर के घर जाता और उस से भिक्षा ग्रहण करता। तथा इस प्रकार रांझा के दिल को तसल्ली महसूस होती। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा।

हीर और रांझा ने एक साथ भाग जाने की योजना बनाई। जब वो दोनों एक साथ उस गांव से भागकर किसी दूसरे गांव की तरफ जा रहे थे। उसी समय हीर के पिता ने यह बात राजा को बता दी। तभी राजा ने दोनों को पकड़ने का आदेश दे दिया। जब राजा ने उन्हें पकड़ लिया, तो हीर और रांझा को कड़ा इम्तिहान देना पड़ा। लेकिन तभी राजा को महसूस हुआ कि हीर और रांझा एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। राजा ने हीर के पिता को उसकी शादी रांझा से कराने का आदेश दे दिया।


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हीर और रांझा एक पल के लिए बहुत खुश हुए। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली थी। हीर के चाचा को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। और उसने उसके खाने में जहर मिला दिया। जैसे ही हीर ने खाने को खाया तो जहर के प्रभाव से वह तुरंत ही मर गई। जब यह बात रांझा को पता लगी तो वह बहुत दुखी हुआ। और उसे लगा कि अब इस दुनिया में रहने से कोई फायदा नहीं है। और वही खाना रांझा ने भी खा लिया। इस प्रकार दोनों की प्रेम कहानी का एक दुखद अंत हो गया।

Heer ranjha ki majar


जब राजा को दोनों के मरने की खबर लगी तो उसने उन दोनों की याद में झंग पाकिस्तान में एक मजार बनवा दी। आज भी लाखों लोग उस मजार के दर्शन करने के लिए जाते हैं।

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