सोहनी और महिवाल की अनोखी प्रेम कहानी |Sohni mahiwal true love story

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इस मशहूर प्रेम कहानी का जन्म 18 वीं सदी में पंजाब में हुआ था। पंजाब में चिनाब नदी के किनारे तुला नामक कुमार एक लड़की ने जन्म लिया। वह लड़की जन्म से ही बहुत सुंदर थी।उस लड़की का नाम सोहनी sohni रखा गया। पंजाब में सुंदर लड़कियों को सोहनी के नाम से पुकारा जाता था अतः उस लड़की का नाम सोहनी रखा गया। दूसरी तरफ पंजाब से कोसों दूर बुखारा (उज़्बेकिस्तान -अब पाकिस्तान में है) में एक मुगल व्यापारी के घर एक लड़के ने जन्म लिया। जिसका नाम इज्जत बेग रखा गया।

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जब इज्जत बेग बड़ा हो गया तो उसने भारत भ्रमण की इच्छा जताई । अतः वह भारत भ्रमण के लिए दिल्ली पहुंचा। दिल्ली में कुछ दिन रुकने के पश्चात वह लाहौर की तरफ निकल गया। जब लाहौर में उसका मन नहीं लगा तो उसने वापस बुखारा लौट जाने के बारे में सोचा। जब वह बुखारा के लिए वापस जा रहा था उसी समय रास्ते में वह तुला के घड़े देखने लग गया ।घड़ों पर बहुत सुंदर कलाकृति बनी हुई थी। वो कलाकृतियां इज्जत बेग को बहुत पसंद आई। उसने तुला से पूछा कि घड़ों पर कलाकृतियां किसने बनाई हैं। तब तुला ने बताया कि उसकी बेटी सोहनी ने ये सब कलाकृतियां बनाई हैं। जब इज्जत बेग ने सोहनी को देखा तो वह उसे देखते ही मंत्रमुग्ध हो गया। वह टकटकी लगाए उसे देखता रहा। सोहनी भी उस अनजान व्यापारी को देखकर उस पर मंत्रमुग्ध हो गई।

दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे थे। अतः इज्जत बेग सोहनी को छोड़कर जाना नहीं चाहता था। अतः इज्जत बेग ने अपनी मजबूरी का बहाना बनाकर उस कुम्हार के घर पर नौकरी कर ली। इज्जत बेग को वहां भैंस चराने की नौकरी मिल गई। पंजाब में उस समय भैंस को माहिया तथा भैंस चराने वालों को महिवाल कहते थे। अतः वहां सभी लोग उसे महिवाल कहने लगे और इज्जत बैग का नाम महिवाल पड़ गया।

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दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों छुप-छुपकर कर एक दूसरे से मिलते और बाहों में बाहें डाल कर प्यार जताते। सोनी और महिवाल अपने इस प्यार में बहुत खुश थे। उन्हें ऐसा लगता था कि उन्हें जिंदगी में ऐसी चीज मिल गई है जिसके मुकाबले सारी सुख सुविधाएं फीकी हैं। लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिन तक टिकने वाली नहीं थी।

सोहनी की शादी.....
सोहनी के घर वालों ने उसकी शादी कुम्हार समुदाय में ही एक लड़की से तय कर दी। सोहनी ने शादी का बहुत विरोध किया लेकिन उसके घर वाले नहीं माने। सोहनी के घर वालों को उन दोनों के प्यार के बारे में पता चल चुका था । अतः उन्होंने महिवाल को घर से बाहर निकाल दिया और उसे वहां दोबारा ना आने की धमकी दी।

शादी के पश्चात सोनी बहुत दुखी रहने लगी थी। वह हर समय महिवाल के बारे में सोचती रहती थी और दोनों के मिलन के पलों को याद करती थी। सोहनी की अवस्था ऐसी हो गई थी जैसे मुरझाया हुआ फूल।

दूसरी तरफ महिवाल को जब सोनी के घर से निकाल दिया गया था तो वह जंगल में भटकने लगा और उसने साधु का वेश धारण कर लिया। जब यह बात सोहनी को पता लगी तो वह बहुत दुखी हुई। और उसने महिवाल को खबर भिजवाई के वह अब भी उससे प्यार करती है। और वह हमेशा ही उससे पहले की तरह प्यार करती रहेगी।

इसके बाद सोहनी हर रात चिनाब नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पक्के घड़ों की सहायता से जाया करती थी। वहां सोहनी और महिवाल घंटों तक एक दूसरे से प्यार की बात करते तथा सोहनी स्वयं को महिवाल को समर्पित कर देती थी। महिवाल सोहनी को इतना प्यार देता कि सोहनी दिन भर उस रात के प्यार को याद करती और खुश होती रहती। यह सिलसिला बहुत दिनों तक चलता रहा।

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सोहनी की ननद को पता चल चुका था कि दोनों चिनाब नदी के दूसरी तरफ एक दूसरे से मिलते हैं। अतः सोहनी जिन पक्के घड़ों की सहायता से चिनाव नदी पार करती थी उसकी ननद ने पक्के घड़ों की जगह कच्चे घड़े लगा दिए।

महिवाल के प्यार में डूबी सोहनी ने कच्चे और पक्के घड़ों का ध्यान नहीं दिया और वह उन घड़ों को लेकर नदी पार करने लगी। वह घड़े रास्ते में ही फूूूट गए। और सोहनी डूबने लगी। दूसरे किनारे पर महिवाल ने जब यह देखा तो वह उसे बचाने के लिए चिनाब नदी में कूद पड़ा। नदी की धार इतनी तेज थी कि वह दोनों को बहाकर ले गई। लेकिन दोनों ने एक दूसरे को नहीं छोड़ा और दोनों चिनाब नदी की तेज धारा में जलमग्न हो गए।

सुबह जब मछुआरों ने अपना जाल डाला तो उस जाल में सोहनी और महिवाल की एक दूसरे से लिपटी हुई लाश बाहर आ गई। दोनों लोग मर कर भी एक दूसरे के हो गए। गांव वालों ने उनकी याद में एक स्मारक बनवाया जिसे मुसलमान मजार तथा हिन्दू समाधि के नाम से जाना जाता है। आज यहां लाखों लोग इन दोनों की समाधि को देखने आते हैं। इन दोनों की प्यार की कहानी सदा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के शहदपुर में आज भी दोनों की कब्र है।



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